मंत्र और विज्ञान



मंत्र पूरी तरह से ध्वनि विज्ञान पर आधारित हैं, जैसे आधुनिक चिकित्सा जगत में अल्ट्रासाउंड ध्वनि विज्ञान पर आधारित है। जिस प्रकार से योग और टेलीपैथी को विज्ञान सम्मत करार दिया गया है, 

वैसे ही मंत्र भी विज्ञान सम्मत हैं। दरअसल, शब्दों की ध्वनि में बड़ी शक्ति होती है। जैसे, एक प्रवीण संगीतज्ञ, गायक गाता है, तो सुनने वाले मुग्ध होकर झूमने लगते हैं, किंतु वही सरगम जब कोई अभ्यास-हीन व्यक्ति गाता है, तो लोग उठकर चले जाते हैं, क्योंकि वह सही ध्वनि-संयोजन नहीं कर पाता। गौर कीजिए, गाली देने पर हमें बुरा क्यों लगता है? संगीत से हमें आनंद या प्रसन्नता क्यों मिलती है? और किसी के रोने पर हमें अलग क्यों अनुभव क्यों होता है?संगीत से हमें आनंद या प्रसन्नता क्यों मिलती है? और किसी के रोने पर हमें अलग क्यों अनुभव क्यों होता है? असल में, इन सभी के मूल में ध्वनि का चमत्कार है।

पशु मनोविज्ञान के विख्यात जानकारी जॉर्ज रॉबिन्सन ने अपने प्रयोगों से यह सिद्ध कर दिखाया है कि पियानो की आवाज से मुग्ध चूहों को उनके बिलों से दिन में भी निकाला जा सकता है। अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ पॉल रिचर्ड ने तो संगीत लहरियों के जरिए मछलियों को पकड़ने की विधि ईजाद की है। उनका मानना है कि ध्वनि की क्षमता लक्षण है। इसके जरिए जड़ तत्वों को भी प्रभावित किया जा सकता है। 

ब्रिटेन में एक विख्यात पर्यटन स्थल है-  स्टोन हैवेन। स्टोन हैवेन में पाषाण खंडों की एक लंबी श्रृंखला है। इन पत्थरों की सिफरत यह है कि जब भी कोई स्वर लहरी इनके समीप गूंजती है, तो इनमें कंपन होने लगता है। मंत्रों के पीछे भी ध्वनि शक्ति है। इन्हें पहचानें। सही मंत्रोच्चार से मन-मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। और सकारात्मक ऊर्जा की उपयोगिता बताने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

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