छात्रों में बढ़ता तनाव "Stress among students"
बच्चों में बढ़ता तनाव बच्चों के लिए बहुत ही हानिकारक साबित हो रहा है| यह तनाव बच्चों के पेरेंट्स को भी होता है| यदि आपका बच्चा तनावग्रस्त हो गया हो तो तय मान लीजिए कि उसका मानसिक रूप से विकास रुक जाता है(capability of brain will be lowdown) क्योंकि तनाव के कारण बच्चे की शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन जिस प्रकार होते हैं वह बहुत ही नकारात्मक(negative) होते हैं यदि आपका बच्चा इंटेलिजेंट हो तो इससे कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है लेकिन यदि उसका performance weak हो, यदि वह इंटेलिजेंट होकर ही भी performance नहीं करता तो उसका ज्ञान को कौन जानेगा । लेकिन जो बच्चे stressed रहते हैं वो अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाते, कौन बच्चा चाहता है कि मुझे कम मार्क्स आएं, मैं सफल ना होऊं, सभी बच्चे हैं चाहते हैं कि मैं भी अच्छे मार्क्स लाऊं, अपने यूनिवर्सिटी कॉलेज में फर्स्ट रैंक पर आऊं, सारे बच्चे चाहते हैं कि जो मैं पढूं सो याद हो जाए | लेकिन आप अगर तनाव में रहते हैं तो कुछ भी नहीं कर सकते हैं जिस समय आप तनाव में रहते हैं उस समय आप अच्छे से पढ़ नहीं पाते या किसी काम को कर नहीं सकते हैं तो उसे कम करने के लिए दोस्तों से बात करते हैं, टीवी देखते हैं ,गाना सुनते हैं, इंटरनेट चलाते हैं ,नहीं तो फिर आप बंद कमरे में रोने लगते हैं।
( every student wishes to be the best performer in his or her studies but because of stress he's unable to concentrate on his performance and to make himself depression free student do many things like he talks to his friends,engages himself in t.v or surf on internet or simply cries out lonely in room) लेकिन आपका परफॉर्मेंस कुछ नहीं रहेगा तो आप कुछ भी नहीं कर सकते अगर आप तनाव में रहते हैं ।
इससे आप उबरने के लिए सोचते हैं तो आपके मन में सवाल उठता है कि तनाव आता कहां से है
कुछ महत्वपूर्ण तनाव पैदा करने के स्रोत।
Causes of stress
1) Lack of parenting skills - यानी परवरिश करने की कुशलता में कमी| मैं यहां पैरंट्स को दोष नहीं देता हूं, जब से भारत में उदारवाद(Liberalism) आया है अर्थात जब से Marketization होने लगा है तब से हुमन का रिलेशन मशीन से ज्यादा होने लगा । और और पेरेंट्स भी अपने इकनोमिक को बेहतर करने के ऊपर कार्य करने लगे हैं जिससे बच्चे से बात करने का समय ही नहीं रह गया है उनके पास|बच्चा दिन भर लैपटॉप मोबाइल से चिपके रहते हैं अगर उसे पेरेंट्स से बात भी करना हो तो पेरेंट्स के पास समय नहीं होता या बात करें तो कहते हैं कि यह सब बेकार की बातें हैं उसके भावना को समझ नहीं पाते हैं जिससे बच्चों में तनाव बढ़ रहा है।
2 ) Lack of actual schooling & teaching
हमारे देश में टीचर भी बेहतर हैं और स्कूल कॉलेज भी जगह जगह पर हैं फिर भी हमारे देश के स्कूलिंग एंड टीचिंग सिस्टम एक्चुअल नहीं है । आजकल इंडिया में कोर्स खत्म करने और परीक्षा में अच्छे नंबर पर ही ध्यान दिया जाता है जिससे बच्चा पढ़ नहीं पाता है आगे चलकर जब कैरियर नहीं बना पाता है तो तनाव में रहने लगता है।
3 ) involvement of children in affairs
आजकल के बच्चे भावना को न समझते हुए रिश्ते में पड़ने लगते हैं और प्यार मोहब्बत के चक्कर में पड़कर अपने कैरियर को बर्बाद कर देते हैं । जब वहां इसमें धोखा हो जाता है या इसमें लिप्त(invole) हो जाता है तो वे धीरे धीरे तनावग्रस्त होते चले जाते हैं।
4) Improper diet जब से वैश्वीकरण हुआ है तब से हमारे खान पान की चीजों में जंक फूड जैसे कि पिज्जा,बर्गर इत्यादि जैसी चीजों ने जगह बना ली है और इसकी वजह से हमारे खाने में टॉक्सिन की मात्रा बढ़ गई है जिससे हमारे अंदर काम-क्रोध-ईर्ष्या का जल्द से जल्द विकास होता है और हमारे जिंदगी को तनावग्रस्त करके बर्बाद कर देता है|
आईए हम अपने जीवन में इन बातों को ध्यान में रखकर अपने जिंदगी को खुशहाल बनाएं
आप हमेशा मुस्कुराते एवं खुश रहे...
~ आपका मित्र अंशु मिश्रा




Mst hai
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