Effect of generation gap in upbringing and culture
तो क्या है ये generation gap?
जनरेशन गैप मूल रूप से विभिन्न पीढ़ियों के बीच का अंतर है। 1960 के दशक में जनरेशन गैप के अंतर के सिद्धांत ने कहा है कि युवा पीढ़ी हमेशा पुराने पीढ़ियों के विचारों, दृष्टिकोणों और विश्वासों पर सवाल उठाते और चुनौती देते हैं।
जो हमारी पीढ़ी को अंदर से खोखला कर रहा है तो आइए इसके बारे में हम थोड़ा विस्तार से जानते हैं |जेनेरेशन गैप यानी पीढ़ी का अंतर यह उत्पन्न होता है एक पीढ़ी और दूसरी पीढ़ी के संपर्क में ना रहने से| संपर्क में ना रहना का तात्पर्य यह नहीं कि कोई अपने लोगों से दूर रह कर संपर्क नहीं बना पा रहा है मगर जेनेरेशन गैप का तात्पर्य यह है कि वह व्यक्ति पास रह कर भी दूर है|
आज के संसार का मनुष्य अपने भौतिक सुख की प्राप्ति के लिए अपने जीवन को झोंक देता है और इस वजह से वह अपने बच्चों को समय नहीं देता वह अपने कमाई को हीं अपना सुख समझने लगता है जिसका उसके बच्चों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है| वह मनुष्य अपने बच्चों को समय नहीं देता और इस से उसके बच्चों से उसका तालमेल कम हो जाता है| उसके बच्चे उस से दूरी बनाने लगते हैं और ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि वह मनुष्य अपने बच्चों के साथ समय नहीं बिता पाया होता है तो बच्चे उसको समझ नहीं पाते कि वह इंसान उनके साथ मित्रता का भाव रख सकता है कि नहीं| यह बात जब हद से ऊपर निकाल जाती है तो फिर बच्चे अपने जीवन की परेशानियां भी अपने लोगों के साथ नहीं बांट पाते| बच्चे उनसे अपनी छोटी से छोटी बात भी नहीं बोल पाते क्योंकि उनको यह पता नहीं होता कि उनको अगर वह अपनी परेशानी बताएंगे तो इसका क्या उत्तर मिलेगा| अधिकतर बच्चों को यह डर भी होता है कि वह कहीं बच्चों को ही उस परेशानी के लिए जिम्मेदार ठहराएं| बच्चे इस कारण कई बार अपनी परेशानियां सुलझाने के लिए गलत राह पर निकल पड़ते हैं और इस से अधिकतर बच्चों की परेशानियां खत्म भले हीं क्यों ना हो जाएं लेकिन कई बार उन बच्चों को यही लगेगा की वह खुद उस परेशानी से निकल सकते हैं बिना किसी और की सहायता के और इसके लिए उनको मदद की आवश्यकता नहीं| ये राह उनको कई बार विनाश की और भी ले जाती है लेकिन अपने विनाश की कगार पर पहुंच कर भी वह अपने माता पिता की सहायता लेने में संकोच करते हैं| वह इसकी जगह ऐसे लोगों की सहायता लेते हैं जो ऐसी परेशानियों से निकल चुके हों लेकिन अपने parents की सहायता की बात भी फिर बाद में उन्हें घुटन लगती है|
इस समस्या का अगर निवारण सही समय पर ना किया जाए तो बच्चे अपने माता पिता को एक बोझ भी समझने लगे हैं और या तो वह उनसे दूर हो जाते हैं या उन्हें दूर कर देते है और इसके लिए कई लोग वृद्धाश्रम का सहारा भी लेते हैं| और वह उनको दूर कर यह समझते हैं कि उनका बोझ उतार गया है और उनमें से भी कई लोग अपने माता पिता को ऐसा करते हुए देख कर उन्हीं की तरह हरकते भी करते हैं वह कई बार अपने बच्चों से सही तरीके से बात भी नहीं करते और फिर उनके बच्चों ने अपने माता पिता को ऐसे समस्या का निवारण करने के लिए वृद्धाश्रम का सहारा लेते देखा होता है और इस वजह से कई बच्चे फिर अपने माता पिता को घर से बाहर निकाल देते हैं या खुद उनसे दूर हो जाते हैं और यह समस्या बरकरार रहने लगती है| इसलिए सही समय पर इस समस्या का निवारण करें ।
* समाधान *
हमें बड़ों को साथ रखना होगा।उनके मानसिक स्वास्थ का भी ध्यान रखना होगा।उन्हें समय देना होगा जिससे वे मानसिक बिमारियों से ग्रसित न हों।हमें उनका सम्मान करना होगा जिससे बच्चों में मूल्यों का विकास होगा।उन्हें बोझ नही बल्कि जिम्मेदारी समझना होगा।क्योंकि हम नही चाहेंगे कि हमारे अगली पीढ़ी हमें भी वृध्दाश्रमों की सैर कराये। हमें ऑनलाईन रिश्तों की बजाह परिवार और वास्विक रिश्तों को क्वालिटी टाईम देना होगा।हमें थोड़ा बड़ों को समझना होगा और थोड़ा खुद को समझाना होगा।
लोगों को एक-दूसरे पर अपने विचारों और विश्वासों को थोपने के बजाए एक-दूसरे के व्यक्तित्व का सम्मान करना चाहिए। इस तरह हम और हमारे बड़ों व बच्चों में सामांजस्य बनाना होगा तभी जाकर जनरेशन गैप कम होगा।
आप हमेशा मुस्कुराते एवं खुश रहें...



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