हमेशा सीखते रहे "Always learning"
आज मै आपसे जिस विषय पर बात करना चहता हूँ उसका नाम है ” LEARNING “.
मनुष्य में एक ऐसा विशिष्ट गुण है, जो उसे बाकी प्राणियों से भिन्न बनाता है ।और जिस गुण के बल पर वह आज महाबली बन गया है। वह गुण है-निरंतर सीखना (leaming) । यह इनसान की सीखने की भूख ही है, जो उसे निरंतर
नए आविष्कार करने, निरंतर आगे बढ़ने और कुछ नया सुधार करने को प्रेरित करतीहै। एक बच्चे में भी बचपन से ही सीखने की जबरदस्त प्रवृत्ति होती है और वह अनुकरण (imitation) से तेजी से चीजों को सीखता है। इस तरह
सीखने की यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है और हमारी सोच के आयामों का विस्तार होता जाता है। हम अपने परिवार, दोस्तों, शिक्षकों, पास-पड़ोस, आस-पास
के पर्यावरण, अखबार, पत्रिकाएँ, इंटरनेट, साहित्य, विज्ञान, खेल-कूद-सबसे निरंतर सीखते ही जाते हैं और दिन-प्रतिदिन परिपक्व (mature) होते जाते हैं।
इसमें कोई भी संदेह हमें नहीं होना चाहिए कि ज्ञान का सागर अनंत व अथाह है और हमने इसकी कुछ बूंदें ही चखी हैं। बेहद व्यापक और विस्तृत है. इसमें कोई संदेह नहीं। लिहाजा महत्वपूर्ण एवं बहुआयामी परीक्षा में सफलताके लिए अभ्यर्थी में सीखने की अदम्य ललक और लालसा उसकी राह आसान कर सकती हैं। छोटे से भी सीखने में संकोच बिल्कुल न करे। और आस पास के घट रही घटनाओं को ऑब्जर्व कर उनसे निरंतर। सीखते रहे। सीखने का यह जज्बा परीक्षा ही नहीं उम्र भर मदद करताहै और जीवन पर्यंत अधिगम (life long learning)और आत्मविकास ( self development) का आधार (base )तैयार करता है।
आप हमेशा मुस्कुराते एवं खुश रहें...


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