गीता का कर्मयोग



आज मनुष्य सबसे ज्यादा कर्मशील है और श्री कृष्ण की गीता जो कर्मयोग के माध्यम से कर्म के रहस्य को समझती है ।वह आज के वर्तमान जीवन में मनुष्य के लिए सबसे ज्यादा कारगर सिद्ध हो सकती है। ये हज़ारों साल पुराना ग्रन्थ हमें आज के आधुनिक जीवन में जीने के लिए नया दृष्टिकोण दे सकता है।

न ही कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत 
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः

अर्थात प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति से अर्जित गुणों के अनुसार विवश होकर कर्मकरना पड़ता है। मनुष्य अपना गुण धर्म (रज ,तम  और सत) के अनुसार फल पाता है और काम करता है।ये प्रकृति गुण उसमें परिवर्तन शील भी होते हैं एजब मनुष्य का मन प्राकृतिक गुणों के कारण विचलित होता है तो वो अपने काम को सम्पूर्णता से नहीं कर पाता और इसका मुख्य कारण है -हम लोग कार्य करते हुए उसके लाभ हानि के विषय में सोचते ।अपने कार्य को सिर्फ फायदे के लिए करना। इन सब से मनुष्य अहंकार और प्रतिसपर्धा  की  भावना से युक्त होकर कार्य करता है  ,जिसकी वजह से मनुष्य हमेशा चिंता ग्रसित तथा भययुक्त रहता है कोई काम अपने आप में छोटा और बड़ा नही है ।बस जरूरत है अपने कार्य को बिना उसमें आसक्त हुए करने की अर्थात बिना फल की चिंता न करते हुए उसमें अपना पूर्ण लगाना । स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि मनुष्य  के  चरित्र  का  निर्माण उसके अच्छे या बुरे कर्मों से होता हैं ।
जब हमारा मन लाभ हानि के विचार से  दूर हो कर  कोई कार्य करेगा तो उसके परिणाम भी अच्छे होंगे और आप को एक आत्मसंतुष्टि मिलेगी क्योंकि आपने अपने कार्य को पूजा बना लिया और आप अध्यात्म से जुड़ गए। रविंदर  नाथ टैगोर  ने भी कहा है,- वर्किंग फॉर लव इस फ्रीडम इन एक्शनं। 
आज मनुष्य क्षत्रिय के समान अपने रोजमर्रा की जिंदगी में अर्जुन की तरह लगा हुआ है ।बस समझने की  जरूरत है वो अपने काम को कैसे बिना आसक्त हुए अंजाम दे सकता है यानि कि बिना फल की चिंता किए हुए लाभ, हानि की व्यर्थ चिंता से दूर होकर काम करना जिससे आप एक अध्यात्म की तरफ अग्रसर होंगे और एक मानसिक स्वास्थ्य को पाकर जीवन में परम आनद को प्राप्त होंगे
आज के युग में बहुत सारे  रणछोड़ युवा जब उन्हें किसी भी क्षेत्र मे सफलता नहीं मिलता हैं अर्थात Upsc, pcs, other gov. job में जब वे सफल नहीं हो पाते तो वह समय ,संसाधन, शासनतंत्र, देश को दोष देते हैं।  किंतु उन्हें गीता के कर्म योग से प्रेरित हो कर दृढ़ निश्चय हो कर अपने संकल्प को पूरा करना चाहिए।
गीता में संसार के सभी समस्याओं का हल तुम बस अर्जुन के जगह अपने आप को खड़ा करो और वह जगद्गुरु श्रीकृष्ण से प्रेरित होकर अपने जीवन को निर्वाह करो।

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