नशा एक अभिशाप



 नशे की लत कैसे लगती है।
नशा कोई जन्मजात बीमारी नहीं है। कोई भी जन्म से ही नशे की लत लेकर नहीं आता है। नशे की लत लगने के पीछे कई सारे कारन है।

* कोई लोग देखा-देखि में नशा करते है।

*कोई लोग दुसरो को दिखाने के लिए नशा करते हैकुछ लोग अपने दोस्तों के दबाव की वजह से नशे की शुरआत करते है।

*तनाव और चिंता की वजह से भी लोग नशे का सहारा लेते है, वही कुछ लोग एसे भी होते है ,जिनको अपने परिवार से सहानुभूति और प्यार नहीं मिलता जिसकी वजह से नशे की और आगे बढ़ते है।

*करियर में असफल होने की वजह से भी नशा करते है।

*वही आज की युवा पेढ़ी प्यार में असफल होने की वजह से भी नशा करते है.घर में रोज-रोज कलह के कारण।

*मा-बाप द्वारा अपने बच्चो के पीछे ध्यान न देना और सही संस्कार न देना।

*चाहे वो लड़का हो या लड़की नशा सबके शरीर के लिए हानिकारक है. नशा करने से हमारे दिमाग पर गहेरा असर होता है और दिमाग पर कंट्रोल करलेता ह ।नशा करने वाले जब नशा नहीं कर रहे होते है , तब भी नशे की हालत में ही रहेते है, जिसकी बदोलत उनका स्वाभाव चिडचिड़ा हो जाता है और जब नशा करते है ,तब खुद को शांत पाते है ।इसी चीज को नशे की लत कही जाती है

 नशा करने से नुकसान

* शराब का सेवन करने से लीवर ख़राब होता हैं।

*धुम्रपान करने से कैंसर होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती हैगु टका और तम्बाकू के सेवन से निमोनिया, मुंह का और गुर्देका कैंसर और साँस की बिमारिया होती है.जो लोग 1 से अधिक नशा करते है उनको ह्रदयरोग की तकलीफ हमेशा रहेती है.।केफीन, चरस, अफीन में एसे पदार्थ मोजूद होते है जो आपको उत्तेजित करता है जिसकी बदोलत वो इन्सान कोई ना कोई अपराध कर बैठता है।

नशा करने से कैसे बचे।

जो भी दोस्त या रिश्तेदार नशा कर रहा है उन लोगो से दुरी रखे ताकि आपको भी नशा करने की इच्छा जागृत ना हो.नशा करने वाले दोस्तों के दबाव में कभी भी ना आए.जीवन में "ना" कहने की कला को जल्द से जल्द सिखले।

उतुस्कता के वश में आकार भी नशा का सेवन ना करे. कोई लोग टेस्ट करने के फेर में नशा कर लेते हैं किसी भी प्रकार का तनाव या दबाव होने पर परिवार के सदस्यों के साथ चर्चा करले जिससे आपका मन शांत होगा और नशे की लत से बचे रहोगे.जीवन जीने की कला के सकारात्मक तरीके को अपनाए,अपने मन पर काबू पाना सिखले।

ज्यादा से ज्यादा समय अपने परिवार के साथ बिताए।

अगर परिवार में कोई सदस्य नशा कर रहा है ,तो उनको भी छुडवाए नही तो उनकी यही आदत की वजह से घर के बाकि बच्चे भी नशे के लिए प्रेरित होते है। नशा ही सभी बुराई का प्रथम स्टेज हैं। इससे आदमी मांसाहारी, कामी सभी प्रकार के बुराई उसमे धीरे धीरे व्याप्त होने लगते हैं।

आज कल कॉलेज ,यूनिवर्सिटी में  युवा दोस्त के दबाव या पढ़ाई के भर को कम करने में नही तो फिर अपने दोस्तों को नशा करते देख ,उसके टेस्ट करने के फेर में नशा करने लगते हैं ।शुरुआत के दिनों में सप्ताह में एक बार फिर दो दिन में एक बार और उसके बाद दिन में ही कई बार करने  लगता हैं।फिर वह पूर्ण रूप से नशा के चंगुल में फस जाता हैं। और उसके बाद वह अपने सम्पति ,परिवार ,अचार व्यवहार को बर्बाद कर देता हैं ।उससे धीरे धीरे परिवार और उसके प्रियजन दूर होते चले जाते हैं।एक दिन ऐसा समय आता हैं कि वह अपने अस्तित्व को ही  खत्म कर देता हैं।

इसके छोड़ने का उपाय - जब भी नशा के तलब लगे तो उसके जगह सोंफ ,लौंग, इलायची या अदरख में नींबू के रस मिलाकर छांव में सुखार उसके सेवन कर तो बहुत जल्द ही इससे मुक्ति मिल सकती हैं। परंतु जो नशा करता हैं उसे नशा छोड़ने का मूड बना लिया हो तब ही छूट सकता हैं। नही तो  यह संसार मे उसका  कोई इलाज नहीं हैं। नशा छोड़ने में उसे दृढ़ संकल्पित होना जरूरी हैं।

जिससे मेरा राष्ट्र सशक्त और समृद्धि बनें।

आप हमेशा मुस्कुराते एवं खुश रहें ...
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